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पूर्वोत्तर यात्रा : मणिपुर में दूसरा दिन व हेइजिंगपोट (Heijingpot) की रस्म

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रात को सोने से पहले भास्कर दा ने मुझे बता दिया था कि अगले दिन सुबह 10 बजे के करीब हम लोगो को दुल्हे कि तरफ से दुल्हन के घर हेइजिंगपोट की रस्म (औपचारिक सगाई) में जाना है, इसलिए में सुबह आराम से 8 बजे तक उठा | आज का हमारा पहला एजेंडा था नहाकर तैयार होना, उन दिनों मणिपुर में ठण्ड बहुत ज्यादा तो नही थी लेकिन ठन्डे पानी से नहाया जा सके ऐसा भी नही था और भास्कर दा पहले ही मेरी गरम पानी कि उम्मीदों पर पानी फेर चुके थे, इसलिए मैंने उसके लिए कोई कोशिश भी नही कि और ठन्डे पानी से ही नहा लिया, जिसके बाद हमको जाना था नास्ता करने और हमको नास्ता करवाने जिम्मेदारी दी गयी इबोमचा जी को जोकि हमसे उम्र में काफी बड़े थे लेकिन उनको देख कर कोई भी उनकी उम्र का अंदाज़ा नही लगा सकता था और हम उनको भैया कह कर पुकार रहे थे | उनसे पहले दिन ही मेरी 2 मिनट कि मुलाकात हुई हो चुकी थी इसलिए वो मेरे लिए एकदम नए नही थे, हम उनके साथ पास के बाज़ार में नास्ता करने गए, मुझे लगा कि हमारे लिए नाश्ते कि व्यवस्था बाहर इसलिए कि गयी थी कि शायद इन लोगों ने सोचा होगा कि हम रोटी खाने वाले लोग सुबह चावल वाला मणिपुरी नास्ता पसंद ना करें, ल…

पूर्वोत्तर यात्रा: मणिपुर में पहला दिन, पौना बाज़ार और हेजिंग्पोट की तैयारियां......

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जब हम घर के अन्दर पहुंचे तो अन्दर कुछ युवा मिठाई के डिब्बे तैयार कर रहे थे, ये सारे लोग मेरे लिए नए थे इसलिए भास्कर दा ने सबके साथ मेरा परिचय करवाया | अबुंग कुछ लोगों को लेकर पौना बाज़ार जाने वाला था, मैंने भी जाने का आग्रह किया तो किसी को कोई आपत्ति न हुई, लेकिन अबुंग किसी का इंतजार करने को बोल रहा था और तब तक खाना खाके निपट जाने कि तैयारी में था, मुझे भी भूख लगी थी क्योंकि सुबह से कुछ खाया नही था, लेकिन जैसे ही हम खाना खाने के लिए आगे बढे अबुंग ने कहा तामो (मणिपुरी में बड़े भाई को तामो कहा जाता है) आ गया, तो हम खाना छोड़कर बाज़ार के लिए निकल गए, हम पांच (मै, अबुंग, साना, काइकू और इंदु दीदी) लोग एक मारुती 800 कार में जाके बैठ गए, मै इम्फाल का बाज़ार, यहाँ शाम को लोगों कि दिनचर्या देखने के लिए उत्सुक था, लगभग एक किलोमीटर चलने के बाद अबुंग ने एक पान कि दुकान के सामने गाड़ी रुकवाते हुए कहा कि जरा इसमें पेट्रोल भरवा देते हैं, आपको भले ही ये पढ के आश्चर्य हो होगा कि पान कि दुकान में क्या कोई पेट्रोल भरवाता है ? लेकिन मुझे थोडा सा भी आश्चर्य नही हुआ क्योंकि मुझे मणिपुर के हालात अच्छे से पता थे औ…

पूर्वोत्तर यात्रा: एअरपोर्ट से इरिलबुंग तक का सफ़र और मणिपुरी युद्ध कला ‘हुएन लाल्लोंग’ से परिचय

एअरपोर्ट से हमे घर तक ले जाने के लिए अबुंग जोकि मेरे पुराने परिचित हैं व एक बहन आयी थी, एअरपोर्ट से घर जाना और ऑटो बुक करना मुझे युद्ध जैंसा लग रहा था, हांलाकि मै तो साइड में ही खड़ा था लेकिन भास्कर दा, अबुंग, दीदी और और ऑटो वालों कि बातों से तो मुझे यही महसूस हो रहा था, एक तो आज रविवार था, सवारियों का बड़ा अभाव था ऊपर से पेट्रोल-डीजल का संकट जिस कारण ऑटो वाले मुह माँगा दाम मांग रहे थे, हम सब पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जाने को तैयार हो गये लेकिन अबुंग अभी आता हूँ बोलकर गायब हो गया और जब लौटा तो एक ऑटो साथ लेकर लौटा, उसे बिलकुल भी अच्छा नही लग रहा था कि हम यहाँ की बसों में धक्का खाए |

मैं, भास्कर दा और दीदी ऑटो में बैठ गए, अबुंग बाइक लेकर आया था सो वो उसमे चल पड़ा | रास्ते में चलते हुए भास्कर दा ने दीदी से परिचय करवाया, मेरा उनकी छोटी बहन से पहले से थोडा बहुत परिचय था | फिर वो दोनों आपस में बात करने लगे, मुझे नयी जगह में बोलना कम ही पसंद है, इसके बजाय मै सुनना ज्यादा पसंद करता हूँ, अपने इस स्वभाव के कारण में चुप ही था | लेकिन चुप रहने कि एक और वजह थी और वह वजह थी मेरे मन का संशय, एक तो में हिंद…

पूर्वोत्तर यात्रा: चल पड़ा पूर्वोत्तर कि ओर.........

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आखिरकार 5 फरवरी 2017 को वो घडी आ ही गयी जिसका मुझे कई वर्षों से इंतज़ार था, ऐसा नही कि इस यात्रा को स्थगित करने के मेरे पास कोई वजहें न आयी हों लेकिन इस बार मैंने जैंसे भी हो  मणिपुर जाने की ठानी थी | मणिपुर जाने को मन इतना बेताब था कि सुबह जल्दी ही आंख खुल गयी और सारी तैयारियां पूर्ण करने कि बाद भी समय था कि कट नही रहा था, कैब बुक करके समय से पहले ही एअरपोर्ट के लिए निकल पड़ा सोचा वहीँ इंतज़ार कर लूँगा क्योंकि घर में अब बैठे रहना मुश्किल होता जा रहा था | मेरे लिए इंतज़ार करना कितना मुश्किल था ये आपको बयां नही कर सकता केवल इतना कह सकता हूँ कि फ्लाइट 20 मिनट कि देरी से उड़ने वाली थी और मुझे ये 20 मिनट 2 घंटे के बराबर लग रहे थे | दिल्ली से में अकेले ही इम्फाल जाने वाला था भास्कर दा मुझे गुवाहाटी से उसी फ्लाइट में मिलने वाले थे, भास्कर दा का मणिपुर जाना बहुतबार हुआ है, और पूर्वोत्तर की जानकारी के मामले में उनका कोई सानी नही है अतः मेरी मणिपुर यात्रा के मार्गदर्शक वही थे |
इधर पूर्वोत्तर से दूर उत्तर भारत में जिन लोगों को मेरी पूर्वोत्तर यात्रा कि जानकारी मिली; उन्होंने मुझे अपने अनुभवों, विवेक…

Why I did go North East ? read the story (In Hindi) of before the journey

पूर्वोत्तर यात्रा कि भूमिका ......
पता नहीं क्यों पूर्वोत्तर राज्यों कि यात्रा मेरे लिए हमेशा से ही रोमांचकारी व उत्सुकतापूर्ण रही हैं; शायद एक पहाड़ी को दूसरे पहाड़ियों से आत्मिक आकर्षण ज्यादा रहता हो ? पूर्वोत्तर के लोग, पहाड़ मेरे लिए कभी भी अनजान नहीं रहे, यहाँ आके मुझे घर जैंसा आत्मिक सुख मिलता रहा है | असम, अरुणाचल कि यात्रायें तो मैंने चार साल लगातार कि; यात्रायें क्या बस ये समझिये कि चार साल इन दो राज्यों के बीच ही डोलता रहा; लेकिन इन चार सालों के दौरान कई बार चाहने के बावजदू भी मणिपुर न जा सका | खैर भाग्य से ज्यादा आपको कुछ नहीं मिलता है और घुमक्कड़ी तो भाग्य से ही मिलती है यही सोचकर मैं अपने आपको संतुष्ट कर लेता था, लेकिन यदि आपकी इच्छाएं प्रबल हो तो भाग्य भी आपको रास्ता स्वयं देता है और घुमक्कड़ी के मामले में मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूँ, मेरी जो मित्र-मण्डली, सगे-संबंधियों कि टोली है उनकी जलन को घुमक्कड़ी के मामले में खुद को भाग्यशाली होने का प्रमाण भी मानता हूँ | लेकिन यहाँ में एक बात जरूर कहूँगा; भाग्य उनका साथ नही देता है जो अपनी इच्छाओं को सुबह उठते ही अपने चेहरे को धोते सम…
पिछले एक घंटे से सोने कि कोशिश कर रहा था लेकिन जब महसूस हुआ कि मेरे विचार द्वंदों ने मेरी नींद को सिरहाने से कहीं परे धकेल दिया तो उठकर लिखने बैठ गया अपने इन विचार द्वंदों को और ये विचार द्वन्द क्या ? बस पिछले तीन महीनों कि भाग-म-भाग और चें-चें, पें-पें | कभी मन कहता है कि यहाँ से लिखना शुरू करो; तो दिमाग अड़ जाता है नही यहाँ से मत लिखो इसको अलग से लिखना, तो कभी शब्द अटक जाते हैं ये बोल के कि जनाब ! पहले ये तय करो कि कौनसी यात्रा को पहले लिख के पूरा करना है ?

पूर्वोत्तर यात्रा कि भूमिका लिख रहा हूँ लगभग अंतिम चरण में है पूर्ण होते ही आप सबके लिए यहाँ उपलब्ध होगी साथ ही इसे आप चित्रों के साथ मेरे फेसबुक प्रोफाइल https://www.facebook.com/Pareevrajak.Niraj पर भी पढ़ पाएंगे | 
नोट - पिछले कुछ वर्षो से लेखन कार्य बंद था इसलिए ब्लॉग में केवल मेरे कुछ यात्रा के दौरान लिए गए चित्र ही होंगे, अब धीरे –धीरे मै अपने यात्रा संस्मरणों को लिखने कि कोशिश कर रहा हूँ | अतः यहाँ आपको जल्दी ही पढने को मिलेंगे, लेकिन यात्राओं के दौरान मेरे द्वारा लिए गए चित्रों को आप मेरी फेसबुक प्रोफाइल https://www.facebook.…

और फिर से मै चल पड़ा ....

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नवम्बर में नौकरी छोड़ने के बाद से मै लगातार घूम ही रहा हूँ, कुछ अपनी मर्ज़ी से कुछ वक़्त कि मर्ज़ी से, एक गज़ल कि ये पंक्तियाँ “अपनी मर्ज़ी के कहाँ अपने सफ़र के हम हैं, रुख हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं”... मुझे खूब भाती हैं और इन्हें मै खुद पर सटीक भी मानता हूँ | पिछले तीन महीने मैंने जितनी भी यात्रायें कि वो कोई बहुत पहले से तय नही कि गयी थी, क्योंकि नौकरी छोड़ने कि कोई योजना नही थी; बस योग था अतः सारी यात्रायें संयोगवश, सह यात्री व समय पर आधारित थी इसलिए यात्रा काफी रोचक रही, ऊपर से प्रधानमन्त्री द्वारा दिया गया भारतीय इतिहास में कभी न भूलने वाला तोफा भी मेरी यात्रा शुरू करने से ठीक दो दिन पहले 8 नवम्बर 2016 रात 8 बजे को ही दिया गया था | खैर तीन मास बाद दिल्ली में अब जाके गाड़ी थमी तो यात्रा लेखन और चित्र संपादन में जुटा हूँ, दो–दो, तीन-तीन दिन घर से बाहर निकलना नही हो रहा, दिन से कब रात हो जाती है पता ही नही चलता, सुबह जब लोग उठके अपना गला खंकारने लगते हैं तो मै इसे अपने सोने का अलार्म समझता हूँ | इस तीन मास कि यात्रा में मेरे लिए सबसे रोचक पूर्वोत्तर कि यात्रा रही, आखिर तीन साल के बा…